भजनसंहिता:127-1 में लिखा है, यदि घर को यहोवा न बनाए तो बनाने वाले का परिश्रम व्यर्थ है।
क्यू व्यर्थ है,????और किस घर की बात हो रही है यह????
क्या वो जिसमे हम रहते है???? शायद नहीं.....
फिर किसकी बात हो रही है यहाँ ?
आइए देखते है:-
मति:7:24,में लिखा हैं, इसलिए जो कोई मेरी ये बाते सुनकर उसे मानता है, वह उस बुद्धिमान मनुष्य के सामान ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया हैं,
यहाँ भी एक घर की बात हो रही है कौन है ये घर ??? यह घर और कोई और नही बल्की में और आप है,
क्योंकि 1 कुरि:3-16, में लिखा है क्या तुम नही जानते हो,की तुम परमेश्वर का मंदिर हो,और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है
हम उसका मन्दिर और उसके रहने का स्थान है वो हममे रहना चाहता है वो तो हमारे इस घर में रहना चाहता है लेकिन हम उसे अंदर आने ही नही देते आखिर क्यों?
हम कैसे नही आने देते उसे अपने अंदर???हम तो उससे बहुत प्यार करते है हम क्यों मना करेगे उसे अपने अंदर आने से???? हम तो चाहते है उसे उसे अपने अंदर बुलाना
लेकिन वो क्यों नही आता हमारे अंदर???? आइये देखे:-
लैव्य11:44,में लिखा हैं, क्योंकि में तुम्हारा परमेश्वर हूँ, इस कारण अपने आप को शुद्ध करके पवित्र बने रहो क्योंकि मै पवित्र हूँ.....
अब जो पवित्र है तो उसके रहने की जगह भी पवित्र ही होगी चाहिए।
अब हमे ये तो पता है की परमेश्वर पवित्र है पर शायद हमे ये नही पता की वो आता भी केवल पवित्र जन के पास है वो रहता भी केवल पवित्र जनो में है अब जब तक हम पवित्र नही बनेगे तो उसका आत्मा हममे कैसे रुकेगा...?
क्योंकि हम तो भरे पड़े है गंदगी से गुनाहो से पाप से ऐसा मैं नही बल्कि परमेश्वर का पवित्र वचन कह रहा है
गलातियो:5-19,के मुताबिक शरीर के काम तो प्रकट है,अर्थात व्याभिचार, गंदे काम ,लुचपन,मूर्तिपूजा,टोना बैर, झगड़ा,ईष्या,क्रोध ,विरोद,फूट,विधर्म,डाह,मतवालापन, लीलाक्रीड़ा,और इसके जैसे और-और काम है,
ये है वो सारी लिस्ट जिससे वो हमारे अन्दर नही रह पाता क्योंकि हमारे अंदर पहले से ही इतना सब कुछ भरा हुआ है फिर परमेश्वर के लिए जगह कहा बचती है सारी जगह तो ये सब घेर लेते है हमारे घर की फिर परमेश्वर क्या करे ???
परमेश्वर ने जो करना था वो उन्होंने कर दिया है रोमियो में लिखा है की उसने अपने पुत्र को पापमय शरीर की समानता में और पापबलि होने के लिए भेजकर , शारीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी....
मसीह हमारे लिए पापमय शारीर की समानता में आकर कुर्बान हो चूका है बाप ने उसे हमारे लिए कुर्बान किया है ताकि उस पर विश्वास करने वाला उद्धार पाये....
प्रभु यीशु मसीह ने एक बात कही की जब तक मनुष्य नए सिरे से न जन्मे वो परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नही कर सकता यह बहूत जरुरी है की मनुष्य का एक बार नए सिरे से जन्म लेना जरूरी हैं,क्योंकि जब तक हम नए सिरे से जन्म ना लेगे तब तक हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नही कर सकते और नए सिरे से लेने का मतलब ऊपर लिखी हर बात का त्याग ये ही हैं सारी बाते जो परमेश्वर को हमारे घर में नही रहने देती तभी तो वो हम से दूर रहता हैं,
और जब ये बाते दूर होगी तभी परमेश्वर घर में रहेगा क्योंकि पवित्र वस्तु पवित्र जगह पर ही रहती हैं।
मति:8-24 में लिखा हैं,आखिरी कुछ शब्दो में की जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया ......
कौन है ऐ चट्टान ये और कोई नही यीशु मसीह ही है....
जैसा लिखा है 1 कुरि10:4 में,👍 और सब ने एक ही आत्मिक जल पिया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे जो उनके साथ-साथ चलती थी, और वह चट्टान मसीह था हल्लेलुईया.....
अगर हमारी नीव इस चट्टान पे डली हो तो हम बुद्धििमान कहलाएगे और यह घर फिर गिरने का भी नही।
नीतिवचन 24:3, में लिखा है, घर बुद्धि से बनता है ,और समझ के द्वारा स्थिर होता है....
पर अफ़सोस हमारा घर मसीह जो बुद्धि है से नही बनता पर हमारा घर तो अशुद्ध वस्तुओ से भरा रहता है
लैव्य 14:35, में लिखा है, तो जिसका वह घर हो वह आकर याजक को बता दे की मुझे ऐसा दिखाई पड़ता है की घर में मानो कोई व्याधि है
आज हमारे घर मे भी बहुत सी व्याधि है यानि बहुत अशुद्ध वस्तुए है तभी तो परमेश्वर कह रहे है, लैव्य 14:42, में और उन पत्थरो के स्थान में और दूसरे पत्थर लेकर लगाए और याजक ताजा गारा लेकर घर की जुड़ाई करे
हमे भी अपने घर में से बहुत सारे पत्थर निकाल कर नए पत्थर लगाने है हमे निकालने है बुराई के पत्थर पापो के पत्थर बुरी सोच के पत्थर और डालने है अच्छाई के पत्थर सही कामो के पत्थर प्रेम के पत्थर दया के पत्थर......
पर ध्यान रहे ये काम हमे बहुत सोच समझ कर करना है....
क्योंकि लिखा है
निर्ग:20-25 और यदि तुम मेरे लिए पत्थरों की वेदी बनाओ,तो तराशे हुए पत्थरों से ने बनाना ,क्योंकि जहा तुम ने उस पर अपना हथियार लगाया वहाँ तुम उसे अशुद्ध कर दोगो,याद रखे इस घर को बनाते समय हम अपने हथियार यानि अपनी अकल या समझ नही लगाये वर्ना ये घर अशुद्ध या गन्दा हो सकता है फिर परमेश्वर उसमे नही रहेगे....
1 राजाओ:6-7 में लिखा हैं,बनाते समय भवन ऐसे पत्थरों का बनाया गया, जो वहाँ ले आने से पहले गढकर ठीक किये गए थे , और भवन के बनते समय हाथौडे बसूली या और किसी प्रकार के लोहे के औजार का शब्द कभी सुनाई नही पड़ा .....
जब वो अपने रहने ले लिए घर बनाता है तो उसमे इंसानी अकल नही रहती फिर उसमे किसी भी प्रकार के औजारो की यानि इंसानी अकल नही होती सिर्फ आसमानी अकल होती है जो परमेश्वर की ओर से आती है
और इसके लिए हमे वो आदमी चाहिए जो हर काम का जानकर और हर काम में निपुण हो वो और कोई नही प्रभु यीशु मसीह है
जिसकी माँग राजा सुलेमान भी करते है जब परमेश्वर ने सुलेमान को वो निपुण आदमी दिया तो हमारा घर बनाने के लिए हमे वो निपुण आदमी क्यों नही देगे ? जरूर देगे.....
लेकिन इसके लिए हमे अपने आपको पवित्र करना होगा और अपने घर में अपनी अक्ल को ख़त्म करना होगा तभी ये घर परमेश्वर के रहने लायक हो पायेगा
खुदा हमारी मदद करे और हमारा घर उसके रहने लायक बन पाये
परमेश्वर हमारी इसमें मदद करे आमीन....
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