Wednesday, April 26, 2017

आज की रूहानी रोटी:-

एक सवाल के साथ शुरू करते हैं?

हम "गुड फ्राइडे" के बारे में क्या जानते हैं?

आइये इसे पवित्र आत्मा की सहभागिता में समझने की कोशिश करे।

यह हकीकत हैं कि दुनिया का यह पहला और आखरी प्रचार था जिसे प्रभु यीशु मसीह ने कलवरी की क्रूस पे से दीया और जिसका पहला विषय यानी टोपिक जो लिया वह यह हैं...

लुका 23: 34, में लिखा हैं,
"तब यीशु ने कहा; हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं।

सवाल नम्बर 1 - ऐसा वहाँ उस भीड़ में क्या हो रहा था प्रभु यीशु मसीह की नज़र में, वो ऐसा क्या कर रहे थे की प्रभु यीशु मसीह को परमेश्वर से इस तरह प्रार्थना करनी पड़ी ?की हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं।आइये इसे समझे..

वे लोग कोई ऐसा काम अज्ञानता के कारण कर रहे थे जैसे लोग प्रभु यीशु मसीह का मजाक उड़ा रहे थे, उस पर थूक रहे थे,गाली दे रहे थे,अब सवाल यह उठता हैं की क्या वो लोग हक़ीक़त में जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह को क्रूस पर चड़ाया था,यह सब प्रभु यीशु मसीह के साथ ही कर थे? नही वो यह सब यीशु मसीह के साथ नही बल्कि यह सब यीशु मसीह के साथ करके परमेश्वर का ही मजाक उड़ा रहे थे, परमेश्वर पर ही थूक रहे थे और परमेश्वर के प्रेम को ठुकरा रहे थे। जैसा कि परमेश्वर ने अपने दास यहुन्ना के द्वारा पहले ही से लिखवा दिया था।

यहुन्ना 3:16,में लिखा हैं,"क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।

क्योंकि परमेश्वर की योजना तो मुझे और आपको बचाने की थी!आगे देखे.. पौलुस क्या लिखते हैं,

रोमियों 5:8 में लिखा हैं,"परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।"

तो जो भी उस समय प्रभु यीशु के साथ हुआ तो वो क्या प्रभु यीशु के साथ हुआ नही वो सब उन्होंने प्रभु यीशु के द्वारा परमेश्वर के साथ किया जिसे प्रभु यीशु जानते थे,तभी यीशु ने कहा,हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं।

उनकी अज्ञानता में वे परमेश्वर की कृपा को नज़रंदाज़ कर रहे थे, जबकि मानवजाति को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। क्योंकि लिखा हैं,

मत्ती 10:40,में "जो तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजने वाले को ग्रहण करता है।

और हम सब इस बात को जानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह को किसने भेजा तभी प्रभु यीशु मसीह ने कहा....

यहुन्ना 17:3,में लिखा हैं,और अनन्त जीवन यह हैं कि वे तुझ एकमात्र सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, "जिसे तू ने भेजा हैं,जानें। और शायद अज्ञानता के कारण वो यह समझ नही पाये और बजाय उसे ग्रहण करते उन्होंने उसे ठुकरा दिया।यानी परमेश्वर को ही ठुकरा दिया।

यहुन्ना 1:17, में लिखा हैं,"इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची।"

जिसमे परमेश्वर का अनुग्रह, और सच्चाई और परमेश्वर की सच्ची धार्मिकता वास करती थी।

इफिसियों 2: 8 में लिखा हैं,"क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।"

अज्ञानता के कारण ही वे अनन्त जीवन को अस्वीकार कर रहे थे।जैसा....

यहुन्ना 14:6,में लिखा हैं, "यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।"प्रभु यीशु तो रास्ता बन के आए थे मेरे और आप के लिए!!!! परमेश्वर के पास जाने का आगे देखे और क्या था?

यहुन्ना 10:10, में लिखा हैं,"मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।"

बहुतायत का जीवन भी देने आया था!जिसे हमने ठुकरा दिया।

वे परमेश्वर की बुद्धिमत्ता, पापों की क्षमा और छुटकारे का मजाक भी उड़ा रहे थे। पौलुस लिखते हैं,

1 कुरिन्थियों 1: 30 में,"परन्तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा।

परमेश्वर ने सब कुछ मसीह में हमारे लिए रखा।

इफिसियों 1:7,में पौलुस फिर कहते हैं,"हम को उस में उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है।क्या कभी हमने यह सब सोचा था कि आखिर हम कर क्या रहे थे?

प्रभु यीशु मसीह पर थूककर, उसका मज़ाक उड़ाकर, उसको त्यागकर, उन्होंने परमेश्वर के उद्धार को और अनंत जीवन को ही ठुकराया दिया था।

सवाल नंबर 2:- इन सारे हालात का  जिम्मेदार कौन ठहराया जाना चाहिए?

परमेश्वर के वचन के अनुसार, यह सारी शास्त्रों की शिक्षा धर्म के शिक्षको और स्वामीयो की थी। जो आज भी हैं।

मत्ती 23: 13,में लिखा हैं,
"हे कपटी शास्त्रियों और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम मनुष्य के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बंद करते हो, न तो स्वयं ही उसमे प्रवेश करते हो और न उसमे प्रवेश करनेवालो को प्रवेश करने देते हो।"

मरकुस 7:7 में लिखा हैं,"और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्योंकि मनुष्यों की आज्ञाओं को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।"

उस समय भी यह सब हो रहा था,और आज भी बिल्कुल ठीक यही हो रहा हैं सबने अपनी अपनी धार्मिकता को अपना कर परमेश्वर की धार्मिकता से परमेश्वर के लोगो को दूर कर रखा हैं।

विनम्रता के साथ एक सलाह हैं,- हमें पता होना चाहिए कि हमारे लिए गुड  फ्राइडे का क्या महत्व है।और पता होना चाहिए उन 7 कलमा का मतलब जो यीशु ने क्रूस से प्रचार किये।

कही ऐसा तो नही जो पहले हुआ फिर वही दुबारा तो नही हो रहा???

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